नालंदा: बिहार के नालंदा जिले में मद्यनिषेध विभाग के एक्साइज इंटेलिजेंस ब्यूरो (ईआईबी) के सिपाही अजीत कुमार की मौत का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। इस प्रकरण में पुलिस जांच के दौरान शराब तस्करों की गाड़ी का पीछा करने, कथित अवैध वसूली की आशंका और घटना के बाद साक्ष्य छिपाने के आरोप सामने आए हैं। मामले में महिला सब-इंस्पेक्टर पुष्पा कुमारी समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस के अनुसार, जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि शराब की खेप से जुड़ी सूचना मिलने के बाद टीम ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया और घटनास्थल पर वास्तव में गोली कैसे चली। घटना के बाद शराब तस्करों की ओर से फायरिंग किए जाने की जो कहानी सामने रखी गई थी, उसकी भी जांच की गई है।
मुख्यालय को सूचना देने के बजाय स्थानीय दरोगा से संपर्क?
मीडिया रिपोर्टों में पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि पटना मुख्यालय से भेजे गए आधिकारिक दल का उद्देश्य शराब के अवैध कारोबार से जुड़ी सूचनाएं जुटाकर रिपोर्ट देना था। इसी दौरान सिपाही अजीत कुमार को कथित तौर पर शराब की खेप की जानकारी मिली।
जांच में यह सवाल उठा कि अजीत कुमार ने कथित रूप से मुख्यालय को सूचना देने के बजाय नालंदा में तैनात महिला मद्यनिषेध दरोगा पुष्पा कुमारी से संपर्क क्यों किया। पुलिस इस संपर्क और उसके बाद टीम की गतिविधियों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
एक पुलिसकर्मी के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि शराब से लदे वाहन को रास्ते में रोककर अवैध वसूली करने की योजना बनाई गई थी। हालांकि, कथित वसूली की योजना और उसमें शामिल लोगों की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
शराब तस्करों का पीछा करते समय कैसे गई अजीत की जान?
घटना 14 अक्टूबर की रात करीब 10:30 बजे पावापुरी पुल के दक्षिण दौलाचक के पास एनएच-20 पर हुई बताई गई है। पुलिस के मुताबिक, टीम शराब से लदे एक पिकअप वाहन का पीछा कर रही थी। इसी दौरान गोली चली और सिपाही अजीत कुमार उसकी चपेट में आ गया।
जांच में होमगार्ड जवान रिशु कुमार की भूमिका भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, दरोगा पुष्पा कुमारी के निर्देश पर फायरिंग किए जाने का आरोप है। गोली लगने से अजीत कुमार की मौत हो गई।
घटना के बाद कथित तौर पर यह कहानी सामने लाई गई कि शराब तस्करों की ओर से गोलीबारी की गई थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि उस समय कौन-कौन मौजूद था, गोली किस दिशा से चली और घटना के बाद वास्तविक परिस्थितियों को छिपाने की कोशिश हुई या नहीं।
पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक जांच पर टिकी नजर
इस मामले में गोली लगने की दिशा को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। मीडिया रिपोर्ट में पोस्टमॉर्टम और घाव की बनावट का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि गोली सिर के अगले हिस्से से प्रवेश कर पीछे की ओर निकली थी। इस विवरण और पुलिस की ओर से बताई गई घटनाक्रम की थ्योरी के बीच अंतर को लेकर सवाल उठे हैं।
हालांकि, केवल घाव की दिशा के आधार पर गोली चलने की अंतिम दिशा या घटनाक्रम का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इसके लिए बैलिस्टिक रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले साक्ष्य, हथियार की जांच और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान महत्वपूर्ण होंगे।
पुलिस ने मामले में .303 बोर की राइफल, दो मिसफायर कारतूस, एक खोखा और स्कॉर्पियो वाहन जब्त किए जाने की जानकारी दी है। इन साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच से यह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है कि गोली किस हथियार से चली और घटनास्थल पर क्या हुआ था।
महिला दरोगा समेत सात लोग गिरफ्तार
नालंदा पुलिस के अनुसार, मामले की जांच के लिए राजगीर एसडीपीओ संजीत कुमार गुप्ता के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया। कार्रवाई के दौरान महिला सब-इंस्पेक्टर पुष्पा कुमारी, मद्यनिषेध सिपाही अनूप कुमार, होमगार्ड जवान रिशु कुमार, दीनानाथ और सन्नी कुमार को गिरफ्तार किया गया।
इसके अलावा निजी चालक गौरव उर्फ निशांत और शंकर कुमार को भी गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी गई है। इस तरह मामले में कुल सात आरोपित पुलिस की गिरफ्त में आए हैं।
पुलिस के मुताबिक, आरोपितों को मेडिकल परीक्षण के बाद न्यायालय में पेश किया गया और न्यायालय के आदेश पर जेल भेज दिया गया। गिरफ्तारी के बाद अब जांच का केंद्र यह है कि किसकी क्या भूमिका थी और घटना के बाद कथित रूप से गलत कहानी तैयार करने या साक्ष्य छिपाने में कौन शामिल था।
ईआईबी की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल
ईआईबी का काम शराब के अवैध कारोबार से जुड़ी सूचनाएं जुटाकर संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाना है। रिपोर्टों के अनुसार, ऐसी सूचनाओं के आधार पर आगे की कार्रवाई निर्धारित विभागीय प्रक्रिया के तहत की जाती है।
इस मामले में कथित तौर पर मुख्यालय को सूचना दिए बिना स्थानीय स्तर पर कार्रवाई किए जाने की बात सामने आने से विभागीय प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठे हैं। जांच में यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि संबंधित टीम को क्या निर्देश दिए गए थे, सूचना किसे दी गई और वाहन का पीछा करने का निर्णय किन परिस्थितियों में लिया गया।
पुराने आरोपों की भी चर्चा, लेकिन पुष्टि जरूरी
मीडिया रिपोर्ट में महिला दरोगा पुष्पा कुमारी के पूर्व कार्यकाल से जुड़े कथित वसूली और शराब कारोबारियों से संपर्क के आरोपों का भी उल्लेख किया गया है। संपत्ति खरीदने तथा निजी जीवन से जुड़ी कुछ बातें भी रिपोर्ट में सामने आई हैं।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है और इन्हें मौजूदा मामले में सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। सिपाही की मौत से जुड़े मामले में मुख्य महत्व उन साक्ष्यों का होगा जो घटना, गोली चलने की परिस्थितियों और आरोपितों की कथित भूमिका को स्पष्ट करें।
अब फॉरेंसिक रिपोर्ट से खुलेंगे कई सवाल
सिपाही अजीत कुमार की मौत ने मद्यनिषेध विभाग की टीम की कार्रवाई, शराब तस्करों का पीछा करने के कारण और घटना के बाद सामने आई कहानी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सात लोगों की गिरफ्तारी के बाद भी मामले की कई अहम कड़ियां जांच के अधीन हैं।
अब फॉरेंसिक और बैलिस्टिक जांच, आरोपितों के बयान तथा अन्य साक्ष्यों से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि गोली किन परिस्थितियों में चली, क्या कथित अवैध वसूली की कोई योजना थी और घटना के बाद साक्ष्य छिपाने के आरोपों में कितनी सच्चाई है। फिलहाल पुलिस जांच और न्यायालय की प्रक्रिया पूरी होने तक आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
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