लखीसराय : जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान बन चुके लखीसराय संग्रहालय के उद्घाटन और लोकार्पण को शुक्रवार को एक वर्ष पूरा हो गया। इस एक साल के दौरान संग्रहालय न केवल स्थानीय लोगों बल्कि बिहार के विभिन्न जिलों, देश के अन्य राज्यों और विदेशों से आए पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है।
गौरतलब है कि 6 फरवरी 2025 को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी प्रगति यात्रा के दौरान लखीसराय संग्रहालय का उद्घाटन किया था। इसके बाद 7 फरवरी 2025 से कला, संस्कृति एवं युवा विभाग (संग्रहालय निदेशालय) के निर्देशानुसार टिकट व्यवस्था के साथ संग्रहालय आम दर्शकों के लिए खोल दिया गया।

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संग्रहालय में वर्ष भर दर्शकों ने पौराणिक मूर्तियों, लाली पहाड़ी उत्खनन से प्राप्त अवशेषों, कुषाण काल की प्रसिद्ध शालभंजिका प्रतिमा, टेराकोटा का विशाल मृद्भांड, प्राचीन मुहरें, विलुप्त सिक्कों का संग्रह तथा बौद्ध, जैन, वैष्णव, शैव एवं शाक्त परंपराओं से जुड़ी ऐतिहासिक कलाकृतियों का अवलोकन किया।
आंकड़ों के अनुसार 5 फरवरी 2026 तक संग्रहालय में कुल 63,887 टिकटों की बिक्री हो चुकी है, जबकि लगभग 18 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं ने शैक्षणिक भ्रमण के दौरान यहां पहुंचकर जिले की सांस्कृतिक विरासत को करीब से जाना। विदेशी पर्यटकों में भूटान, नेपाल, श्रीलंका, ब्रिटेन, म्यांमार और फिनलैंड से आए आगंतुकों ने भी संग्रहालय की सराहना की।

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तत्कालीन संग्रहालयाध्यक्ष मृणाल रंजन और तकनीकी सहायक राजेश कुमार के निर्देशन में संग्रहालय को आधुनिक और आकर्षक स्वरूप दिया गया है। बिहार का दूसरा सबसे बड़ा संग्रहालय होने के कारण यह जिले और राज्य के लिए गौरव का विषय बन चुका है।
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दर्शकों के लिए संग्रहालय परिसर में झूले, सभागार और शैक्षणिक गतिविधियों की विशेष व्यवस्था है। दिव्यांगजन और विद्यार्थियों के लिए प्रवेश निःशुल्क है, जबकि 12 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए 5 रुपये और वयस्कों के लिए 10 रुपये टिकट शुल्क निर्धारित है।
