शेखपुरा जिले के ऐतिहासिक गिरिहिंडा पहाड़ पर उस समय एक अनोखा दृश्य देखने को मिला, जब रामाधीन कॉलेज की इतिहास विषय की छात्राएं इस क्षेत्र के सांस्कृतिक और पौराणिक महत्व को समझने के लिए शैक्षणिक भ्रमण पर पहुंचीं। यह पहाड़ केवल स्थानीय श्रद्धा का केंद्र नहीं, बल्कि महाभारत काल से जुड़ी मान्यताओं और लोककथाओं के कारण एक विशेष पहचान रखता है।

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गिरिहिंडा पहाड़ पर स्थित बाबा कामेश्वरनाथ मंदिर को लेकर स्थानीय समाजसेवी संतोष कुमार ने छात्राओं को बताया कि यहां स्थापित शिवलिंग को महाभारत काल से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इसी क्षेत्र में हिडिम्बा नामक राक्षसी रहती थी, जिससे महाबली भीम का गंधर्व विवाह हुआ और घटोत्कच का जन्म हुआ। इस ऐतिहासिक कथा ने छात्राओं को भारतीय पौराणिक विरासत की गहराई से परिचित कराया।

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हालांकि, इस आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व के बीच आधुनिक समस्याएं भी सामने आईं। मंदिर परिसर में शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी, सुरक्षा व्यवस्था का अभाव और पर्यटकों के लिए सीमित संसाधन प्रमुख चिंताओं के रूप में उभरे। स्थानीय लोगों ने बताया कि यहां अक्सर श्रद्धालुओं को असुविधाओं का सामना करना पड़ता है, जिससे पर्यटन विकास की संभावनाएं प्रभावित होती हैं।

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छात्राओं ने इस यात्रा को ज्ञानवर्धक बताते हुए कहा कि यह स्थल इतिहास, आस्था और सामाजिक चुनौतियों का अनूठा संगम है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आधारभूत सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार किया जाए, तो गिरिहिंडा पहाड़ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी धार्मिक पर्यटन का आकर्षक केंद्र बन सकता है।
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इस शैक्षणिक भ्रमण ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भारत के छोटे शहरों और गांवों में छिपी ऐतिहासिक धरोहरें विश्व पटल पर पहचान पाने की क्षमता रखती हैं, बस उन्हें सही दिशा और संरक्षण की आवश्यकता है।