पटना: बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। गुरुवार को चुनाव प्रचार थम गया और अब सभी की निगाहें शुक्रवार, 23 अक्टूबर को होने वाले मतदान पर टिकी हैं। सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक वोटिंग होगी। इन चुनावों में 150 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करीब 5.33 लाख मतदाता करेंगे। मतदान के लिए कुल 933 बूथ बनाए गए हैं।
चुनाव से ठीक एक दिन पहले जदयू प्रत्याशी नीरज कुमार से मिलने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहुंचे। बताया गया कि उन्होंने नीरज कुमार के स्वास्थ्य का हाल जाना और करीब पांच से सात मिनट तक मुलाकात करने के बाद लौट गए। नीरज कुमार बुधवार को अस्पताल से डिस्चार्ज होकर घर लौटे थे। चुनाव के ठीक पहले हुई इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है।
हालांकि, इस चुनाव की सबसे ज्यादा चर्चा पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र को लेकर है। यहां जदयू के नीरज कुमार के सामने जन सुराज के प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह और राजद के दिलीप कुमार चुनौती पेश कर रहे हैं। अनुज सिंह को विधायक अनंत सिंह का समर्थन मिलने की बात सामने आई है। अनंत सिंह ने नीरज कुमार को हराने की चुनौती दी है। अब सवाल है कि क्या उनका समर्थन चुनावी नतीजों को प्रभावित कर पाएगा, या नीरज कुमार एक बार फिर अपनी सीट बचाने में सफल होंगे?
8 सीटों पर 150 उम्मीदवार, 5.33 लाख मतदाता
बिहार विधान परिषद की जिन आठ सीटों पर चुनाव हो रहा है, उनमें चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। स्नातक सीटों पर 90 उम्मीदवार, जबकि शिक्षक सीटों पर 60 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में पटना, दरभंगा, तिरहुत और कोसी शामिल हैं। इन चार सीटों पर कुल 4,92,594 मतदाता हैं और मतदान के लिए 598 केंद्र बनाए गए हैं। वहीं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में पटना, दरभंगा, तिरहुत और सारण की चार सीटें शामिल हैं। इन पर 40,253 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। शिक्षक सीटों के लिए 335 मतदान केंद्र बनाए गए हैं।
इस तरह दोनों श्रेणियों को मिलाकर मतदाताओं की संख्या 5,32,847 होती है, यानी करीब 5.33 लाख। स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की तुलना में काफी अधिक है।
पटना स्नातक सीट पर नीरज कुमार बनाम अनुज सिंह
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र इस बार सबसे ज्यादा चर्चा में है। यहां जदयू के नीरज कुमार, जन सुराज के डॉ. अनुज सिंह और राजद के दिलीप कुमार के बीच मुकाबला है। चुनाव में अनंत सिंह की भूमिका ने इस सीट को और दिलचस्प बना दिया है।
अनंत सिंह खुद उम्मीदवार नहीं हैं, लेकिन वह जन सुराज के प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह का समर्थन कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अनंत सिंह ने नीरज कुमार को हराने की चुनौती दी है। दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी भी चर्चा में रही है। ऐसे में इस सीट पर मुकाबला केवल उम्मीदवारों के बीच नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रभाव और समर्थन की परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है।
पिछले चुनाव यानी 2020 में नीरज कुमार ने राजद के आजाद गांधी को हराया था। उस चुनाव में नीरज कुमार को 20,948 और आजाद गांधी को 12,696 वोट मिले थे। नीरज कुमार ने 8,252 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। इस बार उनके सामने नई चुनौती है और मतदाताओं का रुख तय करेगा कि वह अपनी पिछली जीत दोहरा पाते हैं या नहीं।
आठों सीटों पर किसके बीच मुकाबला?
1. पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र
इस सीट पर जदयू के नीरज कुमार, जन सुराज के डॉ. अनुज सिंह और राजद के दिलीप कुमार के बीच मुकाबला है। अनुज सिंह को अनंत सिंह का समर्थन मिलने से चुनावी समीकरण पर सबकी नजर है। पिछले चुनाव में नीरज कुमार ने आजाद गांधी को हराया था। इस बार मुकाबले का केंद्र अनंत सिंह की चुनौती और नीरज कुमार की राजनीतिक पकड़ बनी हुई है।
2. पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र
पटना शिक्षक सीट पर नवल किशोर यादव और राजद के संजीव कुमार सिंह के बीच मुकाबले की चर्चा है। संजीव कुमार सिंह परबत्ता के पूर्व विधायक रह चुके हैं। इस सीट पर दिए गए आंकड़ों के अनुसार, मतदाता संख्या 11,719 है। पिछले चुनाव में नवल किशोर यादव ने राजद के नारायण यादव को हराया था। अब देखना होगा कि शिक्षक मतदाता इस बार किस उम्मीदवार पर भरोसा जताते हैं।
3. दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र
दरभंगा स्नातक सीट पर राजद ने अनिल कुमार झा को मैदान में उतारा है, जबकि छात्र नेता दिलीप कुमार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। पिछले चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार सर्वेश कुमार ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने जदयू के डॉ. दिलीप कुमार चौधरी को हराया था। इस बार मुकाबले में पुराने चुनावी समीकरण और नए प्रत्याशियों की रणनीति अहम हो सकती है।
4. दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र
इस सीट पर कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा और जदयू के प्रो. घनश्याम राय के बीच मुकाबला बताया गया है। घनश्याम राय विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े रहे हैं। पिछले चुनाव में मदन मोहन झा ने भाजपा के सुरेश प्रसाद राय को हराया था। शिक्षक मतदाताओं के बीच दोनों उम्मीदवारों की पकड़ इस सीट का परिणाम तय करने में अहम होगी।
5. तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र
तिरहुत स्नातक सीट पर जदयू के अभिषेक झा और राजद की डॉ. रश्मि विनायक गौतम के बीच मुकाबला है। इस क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या एक लाख से अधिक है। पिछले उपचुनाव में निर्दलीय बंशीधर ब्रजवासी ने जीत दर्ज की थी। अब नए चुनाव में प्रमुख दलों के प्रत्याशियों के सामने मतदाताओं का भरोसा हासिल करने की चुनौती है।
6. तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र
तिरहुत शिक्षक सीट पर सीपीआई के संजय कुमार सिंह फिर से मैदान में हैं। जन सुराज ने भूषण झा को उम्मीदवार बनाया है। पिछले चुनाव में संजय कुमार सिंह ने 3,324 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी, जबकि भूषण झा को 2,015 वोट मिले थे। इस बार दोनों के बीच मुकाबले पर नजर रहेगी।
7. कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र
कोसी स्नातक सीट पर भाजपा के डॉ. एन.के. यादव और राजद के नितेश कुमार के बीच मुकाबले की चर्चा है। कांग्रेस से जुड़े रहे अमित विक्रम निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की तैयारी में बताए गए हैं। जन सुराज ने रजनीश रंजन को मैदान में उतारा है। पिछले चुनाव में डॉ. एन.के. यादव ने नितेश कुमार को हराया था। इस बार मुकाबले में कई प्रत्याशियों की मौजूदगी चुनावी गणित को प्रभावित कर सकती है।
8. सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र
सारण शिक्षक सीट पर जन सुराज के अफाक अहमद, राजद के प्रो. जयराम यादव और जदयू के आनंद पुष्कर के बीच मुकाबला है। अफाक अहमद ने पिछले उपचुनाव में जीत हासिल की थी। इस बार उन्हें अपनी स्थिति मजबूत रखने की चुनौती होगी, जबकि अन्य प्रत्याशी शिक्षक मतदाताओं का समर्थन हासिल करने की कोशिश में हैं।
MLC चुनाव में कैसे डाले जाते हैं वोट?
विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान की प्रक्रिया आम विधानसभा या लोकसभा चुनाव से अलग होती है। यहां मतदान बैलेट पेपर के जरिए किया जाता है। मतदाता अपनी पसंद के उम्मीदवार के सामने प्राथमिकता क्रम में अंक लिखते हैं। सबसे पसंदीदा उम्मीदवार के सामने 1 लिखना होता है। इसके बाद मतदाता चाहें तो दूसरे और तीसरे पसंदीदा उम्मीदवार के सामने क्रमशः 2 और 3 भी लिख सकते हैं।
बैलेट पेपर भरते समय निर्धारित निर्देशों का पालन करना जरूरी है। प्राथमिकता के अंक गलत तरीके से लिखने, एक ही प्राथमिकता एक से अधिक उम्मीदवारों को देने या अन्य निर्धारित नियमों का उल्लंघन करने पर मतपत्र अमान्य हो सकता है। इसलिए मतदान से पहले मतदाता को बैलेट पेपर पर दिए गए निर्देश ध्यान से पढ़ने चाहिए।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मतदान के लिए निर्धारित शैक्षणिक और अन्य पात्रता शर्तें पूरी करना जरूरी है। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भी मतदाता बनने के लिए निर्धारित सेवा संबंधी पात्रता लागू होती है। पात्र मतदाताओं की अंतिम सूची और नियमों की पुष्टि निर्वाचन विभाग के निर्देशों से की जानी चाहिए।
MLA और MLC में क्या अंतर है?
MLA यानी विधायक विधानसभा का सदस्य होता है, जबकि MLC विधान परिषद का सदस्य होता है। विधायक आम तौर पर विधानसभा चुनाव में जनता के सीधे मतदान से चुने जाते हैं। विधान परिषद के सदस्यों का चुनाव अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों और निर्धारित श्रेणियों के माध्यम से होता है। कुछ सदस्य राज्यपाल द्वारा मनोनीत भी किए जाते हैं।
विधायक का सामान्य कार्यकाल पांच वर्ष होता है, जबकि विधान परिषद सदस्य का कार्यकाल छह वर्ष होता है। विधान परिषद एक स्थायी सदन है और इसे विधानसभा की तरह भंग नहीं किया जाता। इसके लगभग एक-तिहाई सदस्यों का कार्यकाल हर दो वर्ष में पूरा होता है। सरकार गठन और वित्तीय मामलों में विधानसभा की भूमिका निर्णायक होती है, जबकि विधान परिषद विधायी प्रस्तावों की समीक्षा और चर्चा में अहम भूमिका निभाती है।
अब शुक्रवार को मतदाताओं के फैसले का इंतजार
बिहार की आठ विधान परिषद सीटों पर मतदान के लिए चुनाव प्रचार थम चुका है। अब उम्मीदवारों की किस्मत मतपेटियों में बंद होगी। एक तरफ स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मतदाता हैं, तो दूसरी तरफ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में सीमित लेकिन विशेष पात्रता वाले मतदाताओं की भूमिका अहम है।
सबसे अधिक निगाहें पटना स्नातक सीट पर रहेंगी, जहां नीरज कुमार और डॉ. अनुज सिंह के बीच मुकाबले को लेकर अनंत सिंह की चुनौती चर्चा में है। नीतीश कुमार की नीरज कुमार से मुलाकात ने भी चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक हलचल बढ़ाई है। हालांकि, अंतिम तस्वीर मतगणना और आधिकारिक परिणाम सामने आने के बाद ही साफ होगी।
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