रांची: झारखंड के सरकारी आईटीआई अब पुराने ढर्रे पर नहीं चलेंगे। आने वाले समय में यहां युवाओं को ऐसी ट्रेनिंग मिलेगी, जो सीधे आधुनिक उद्योगों की जरूरतों से जुड़ी होगी। यानी सिर्फ किताबों की पढ़ाई नहीं, बल्कि मशीनों, डिजिटल तकनीक और नई इंडस्ट्री की मांग के हिसाब से कौशल विकास किया जाएगा।
श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग ने प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई (PM-SETU) योजना के तहत सरकारी आईटीआई को हाईटेक बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए उद्योगों से साझेदारी को लेकर रुचि मांगी गई है।
झारखंड में कुल 77 सरकारी आईटीआई हैं, जिनके इंफ्रास्ट्रक्चर, लैब और पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। योजना के तहत आधुनिक मशीनें लगाई जाएंगी, डिजिटल लर्निंग की सुविधा बढ़ाई जाएगी और रोजगार से जुड़े नए कोर्स शुरू किए जाएंगे।
अब कंपनियां भी तय करेंगी युवाओं की ट्रेनिंग
इस योजना की सबसे खास बात उद्योगों की सीधी भागीदारी होगी। सरकार और कंपनियां मिलकर आईटीआई के विकास की रणनीति तैयार करेंगी। उद्योग आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने, कोर्स डिजाइन करने, प्रशिक्षकों को ट्रेनिंग देने, अप्रेंटिसशिप और प्लेसमेंट में भी मदद करेंगे।
यानी अब आईटीआई से निकलने वाले युवाओं को सिर्फ प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि नौकरी के लिए जरूरी वास्तविक कौशल मिलेगा।
AI से लेकर Industry 4.0 तक की होगी पढ़ाई
नई व्यवस्था में छात्रों को एडवांस मैन्युफैक्चरिंग, इंडस्ट्री 4.0, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल तकनीक, सेवा क्षेत्र और मल्टी-स्किल जैसे आधुनिक विषयों की ट्रेनिंग दी जाएगी।
योजना के तहत हब आईटीआई में करीब 4 नए कोर्स शुरू करने और 10 पुराने कोर्स को आधुनिक बनाने की तैयारी है। वहीं स्पोक आईटीआई में 2 नए कोर्स और 8 पुराने कोर्स अपग्रेड किए जाएंगे।
युवाओं के लिए रोजगार का नया रास्ता
सरकार का मानना है कि इस बदलाव से झारखंड के युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण मिलेगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। वहीं राज्य के उद्योगों को भी प्रशिक्षित मानव संसाधन आसानी से उपलब्ध हो सकेगा।
अब देखना होगा कि हाईटेक आईटीआई का यह सपना जमीन पर उतरकर झारखंड के युवाओं के भविष्य को कितना बदल पाता है।
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