पश्चिम चंपारण: नेपाल के जंगलों से भटककर एक गैंडा बिहार के पश्चिम चंपारण जिले तक पहुंच गया है। धनहा इलाके के देवीपुर गांव में गैंडे की मौजूदगी की खबर से ग्रामीणों के बीच दहशत का माहौल है। बताया जा रहा है कि गैंडा गंडक दियारा के मधुबनी प्रखंड स्थित देवीपुर कोइरी टोला के सरेह में दिखाई दिया। इसके बाद वन विभाग की टीम सक्रिय हो गई है और गैंडे को सुरक्षित पकड़कर जंगल में पहुंचाने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
गैंडे की मौजूदगी से सबसे बड़ी चिंता यह है कि वह आबादी वाले इलाके के आसपास खेतों में छिपा हुआ है। गन्ने और केले की फसल के बीच उसकी तलाश और निगरानी की जा रही है। ऐसे में ग्रामीणों की सुरक्षा के साथ-साथ वन्यजीव को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित रेस्क्यू करना वन विभाग के सामने बड़ी चुनौती है।
गांव के पास गैंडे की मौजूदगी, ग्रामीणों में बढ़ी चिंता
जानकारी के मुताबिक, देवीपुर गांव के सरेह में मंगलवार से गैंडा दिखाई देने की बात सामने आई। इसके बाद स्थानीय लोगों ने वन विभाग को सूचना दी। बताया जा रहा है कि गैंडा आगे बढ़कर गोबरहिया सरेह के गन्ने और केले के खेतों में छिप गया।
खेतों में गैंडे की मौजूदगी के कारण स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों के लिए जरूरी है कि वे उत्सुकतावश उसके करीब जाने या उसे घेरने की कोशिश न करें। जंगली जानवर भयभीत या परेशान होने पर अप्रत्याशित व्यवहार कर सकते हैं।
अब सवाल यह है कि गैंडा किस दिशा में बढ़ रहा है और वह आबादी से कितनी दूरी पर है? वन विभाग की निगरानी और स्थानीय लोगों को समय पर सूचना देना इस स्थिति में बेहद अहम है।
वन विभाग का रेस्क्यू ऑपरेशन, लोहे का पिंजरा लगाने की तैयारी
गैंडे की सूचना मिलने के बाद वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) की टीम सक्रिय हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, वाल्मीकिनगर के DFO के नेतृत्व में वनकर्मी गैंडे की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं।
गैंडे को सुरक्षित पकड़ने के लिए जेसीबी की मदद से लोहे का पिंजरा लगाने की तैयारी की जा रही है। इसके अलावा, बगहा रेंज ऑफिसर मालाकार के हवाले से बताया गया है कि रेस्क्यू अभियान के लिए पटना से विशेष टीम बुलाई गई है।
योजना के तहत GPS सिस्टम, प्रशिक्षित हाथियों और विशेषज्ञों की मदद लेने की बात कही गई है। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की निगरानी में गैंडे को ट्रैंक्विलाइज कर सुरक्षित स्थान पर ले जाने की तैयारी है। हालांकि, रेस्क्यू अभियान के पूरा होने या गैंडे को पकड़ लिए जाने की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
नेपाल से बिहार कैसे पहुंचा गैंडा?
पश्चिम चंपारण का इलाका नेपाल की सीमा से सटा हुआ है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के आसपास जंगल और नदी का क्षेत्र होने के कारण वन्यजीव कभी-कभी अपने प्राकृतिक आवास से बाहर निकलकर आबादी के करीब पहुंच जाते हैं।
प्रारंभिक अनुमान है कि गैंडा नेपाल के चितवन नेशनल पार्क से नारायणी-गंडक नदी के रास्ते इस ओर आया हो सकता है। हालिया बाढ़ के पानी के कारण उसके भटकने की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि, गैंडे के आने का सटीक रास्ता और वजह आधिकारिक तौर पर पुष्ट नहीं है।
इससे पहले 13 अक्टूबर को गंडक दियारा के पिपरासी इलाके में भी एक गैंडा दिखाई देने की खबर आई थी। दोनों घटनाओं के बीच संबंध है या नहीं, इसकी पुष्टि के लिए वन विभाग की जानकारी जरूरी होगी।
ग्रामीणों के सामने चुनौती, गैंडे से दूरी बनाए रखना जरूरी
गैंडे को देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटना रेस्क्यू अभियान में परेशानी पैदा कर सकता है। ऐसे में ग्रामीणों से अपील है कि वे गैंडे के पास न जाएं, उसे भगाने या घेरने का प्रयास न करें और खेतों में उसकी मौजूदगी की सूचना वन विभाग को दें।
वन्यजीव विशेषज्ञों की निगरानी में ही गैंडे को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना उचित होगा। इससे लोगों और जानवर—दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
अब निगाहें वन विभाग के रेस्क्यू अभियान पर टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि गैंडे को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित जंगल तक कैसे पहुंचाया जाएगा और तब तक देवीपुर तथा आसपास के गांवों में लोगों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए जाते हैं।
फिलहाल, वन विभाग की टीम गैंडे की निगरानी और रेस्क्यू की तैयारी में जुटी है। अभियान के सफल होने और गैंडे की सुरक्षित वापसी की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
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