सहरसा: नवरात्र के पावन अवसर पर सहरसा जिले के तेघड़ा गांव में भक्ति और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। गांव के दुर्गा मंदिर में आयोजित रामकथा और भजन कार्यक्रम में श्रद्धालु रामभक्ति के रंग में सराबोर हो रहे हैं। प्रख्यात रामकथा वाचक पूज्य राजीवजी महाराज ने अपने भजनों और भक्तिमय प्रस्तुति से ऐसा समां बांधा कि श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। मंदिर परिसर में भक्ति का माहौल बना रहा और भक्त रामनाम की धुन में लीन नजर आए।
राजीवजी महाराज के भजनों ने बांधा समां, रामभक्ति में डूबे श्रद्धालु
नवरात्र के दौरान तेघड़ा गांव का दुर्गा मंदिर भक्तिमय वातावरण से गुलजार है। यहां आयोजित रामकथा और भजन कार्यक्रम में पूज्य राजीवजी महाराज की प्रस्तुति विशेष आकर्षण बनी हुई है। उनके रामभजनों ने श्रद्धालुओं को भावनात्मक रूप से जोड़ते हुए पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया।
रामकथा और भजन के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों, भक्ति और मर्यादा का संदेश श्रद्धालुओं तक पहुंचाया जा रहा है। नवरात्र के इस आयोजन में ग्रामीणों की भागीदारी धार्मिक उत्साह को और बढ़ा रही है।
वर्षों से दशहरा मेले की परंपरा निभा रहा तेघड़ा गांव
तेघड़ा गांव में दशहरा मेले का आयोजन लंबे समय से धूमधाम के साथ किया जाता रहा है। यह मेला गांव की धार्मिक परंपरा और सामूहिक उत्सव का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। नवरात्र के दौरान दुर्गा मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ रामकथा, भजन-कीर्तन और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है।
मेले के दौरान गांव का माहौल उत्सवमय हो जाता है। स्थानीय लोग मिल-जुलकर आयोजन को सफल बनाने में योगदान देते हैं। धार्मिक कार्यक्रमों के जरिए नई पीढ़ी को भी गांव की परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जाता है।
भजन-कीर्तन के साथ बच्चों के लिए क्विज, संस्कृति और ज्ञान का संगम
तेघड़ा गांव के दशहरा मेले की खासियत केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है। यहां स्थानीय लोगों की ओर से भजन-कीर्तन के साथ बच्चों के लिए क्विज प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाता है। इससे बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने और ज्ञानवर्धक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलता है।
एक ओर मंदिर में भक्ति और रामनाम की गूंज सुनाई देती है, तो दूसरी ओर बच्चों की भागीदारी मेले को सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी खास बनाती है। इस तरह धार्मिक आस्था के साथ शिक्षा, मनोरंजन और सामुदायिक सहभागिता को भी महत्व दिया जा रहा है।
आस्था के साथ सामाजिक एकजुटता का उत्सव
सहरसा के तेघड़ा गांव में नवरात्र और दशहरा मेला ग्रामीण संस्कृति की जीवंत तस्वीर पेश कर रहा है। पूज्य राजीवजी महाराज के रामभजनों से भक्तिमय वातावरण, दुर्गा मंदिर में धार्मिक आयोजन और बच्चों के लिए क्विज जैसी गतिविधियां इस उत्सव को विशिष्ट बनाती हैं।
तेघड़ा का यह आयोजन दिखाता है कि गांवों में त्योहार केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहते, बल्कि लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने, सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने और नई पीढ़ी को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने का अवसर भी बनते हैं। नवरात्र के मौके पर तेघड़ा गांव में भक्ति, परंपरा और उत्साह का यही संगम दशहरा मेले को खास पहचान दे रहा है।