रांची: जमीन निबंधन में कथित गड़बड़ियों को लेकर चल रही कार्रवाई के बीच झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला सामने आया है। कोर्ट ने धनबाद के चार तत्कालीन सब-रजिस्ट्रारों के खिलाफ चल रही विभागीय कार्रवाई को रद्द कर दिया है।
जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने सुनवाई के दौरान साफ कहा कि किसी जमीन का असली मालिक कौन है, खाता-प्लॉट का रिकॉर्ड सही है या नहीं, पुराने और नए सर्वे रिकॉर्ड का मिलान करना निबंधन पदाधिकारी की जिम्मेदारी नहीं है।
कोर्ट के इस फैसले से सब-रजिस्ट्रार संतोष कुमार, सुजीत कुमार, मिहिर कुमार और श्वेता कुमारी को बड़ी राहत मिली है। इन अधिकारियों पर आरोप था कि उन्होंने जमीन दस्तावेजों की जांच में लापरवाही बरती, लेकिन अदालत ने माना कि कानून में ऐसी जांच की जिम्मेदारी निबंधन अधिकारी को नहीं दी गई है।
डिजिटल रिकॉर्ड की गड़बड़ी बनी थी विवाद की वजह
मामला धनबाद में डिजिटल जमीन रिकॉर्ड में हुई गड़बड़ी से जुड़ा था। आरोप था कि कई मौजा की जमीनों के खाता और प्लॉट नंबर ऑनलाइन रिकॉर्ड में बदल गए, जिसके आधार पर 150 से ज्यादा दस्तावेजों की रजिस्ट्री हो गई और बाद में म्यूटेशन भी कर दिया गया।
हालांकि हाईकोर्ट ने कहा कि अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार, मिलीभगत, गलत लाभ पहुंचाने या निजी फायदा लेने का कोई आरोप साबित नहीं हुआ है। सिर्फ रिकॉर्ड सत्यापन को आधार बनाकर विभागीय कार्रवाई नहीं की जा सकती।
अब सवाल यह है…
जमीन रिकॉर्ड में हुई बड़ी गड़बड़ियों की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी? क्योंकि एक तरफ गलत रजिस्ट्री के मामले सामने आए, वहीं दूसरी तरफ हाईकोर्ट ने निबंधन अधिकारियों की जिम्मेदारी की सीमा भी तय कर दी है।
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