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त्योहारी मांग और कीमत में बढ़त से मलेशियाई पाम ऑयल का जलवा, भारत में रिकॉर्ड हिस्सेदारी

भारत में मलेशियाई पाम ऑयल की हिस्सेदारी 2025 की पहली छमाही में बढ़कर 35% हो गई। कीमतों में प्रतिस्पर्धा, आयात शुल्क में कटौती और त्योहारी मांग ने इस बढ़त को रफ्तार दी।

नई दिल्ली:
भारत में मलेशियाई पाम ऑयल की हिस्सेदारी 2025 की पहली छमाही में बढ़कर 35% हो गई है। यह जानकारी मलेशियन पाम ऑयल काउंसिल (MPOC) ने इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IVPA) द्वारा आयोजित ग्लोबल राउंडटेबल 4.0 में दी। MPOC की सीईओ सुश्री बलविंदर सरोन ने कहा कि भारत की खाद्य तेल सुरक्षा में मलेशिया का योगदान अहम है और यह साझेदारी वर्षों से मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है।

उन्होंने बताया कि मलेशिया हर साल भारत को औसतन 25 लाख मीट्रिक टन क्रूड पाम ऑयल (CPO) निर्यात करता है। 2023 में जहां यह हिस्सेदारी 30% थी, वहीं 2025 की पहली छमाही में यह बढ़कर 35% तक पहुंच गई। मई और जून में निर्यात बढ़कर 2.5 लाख मीट्रिक टन प्रतिमाह तक पहुंच गया, जिससे उम्मीद जताई जा रही है कि यह रुझान तीसरी तिमाही तक बरकरार रहेगा।

MPOC और IVPA के बीच एक समझौता भी हुआ है, जिसके तहत मलेशियाई पाम ऑयल के पोषण, स्थिरता और स्वास्थ्य लाभ से जुड़े फायदों को लेकर भारत में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसी कड़ी में मशहूर शेफ शिप्रा खन्ना के साथ “भारत का स्वाद, पाम ऑयल के साथ” नामक कार्यक्रम भी मई से अगस्त तक ज़ी टीवी पर प्रसारित किया जा रहा है।

बलविंदर सरोन ने कहा कि मलेशिया दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा पाम ऑयल उत्पादक देश है और उसका वैश्विक उत्पादन में 24% हिस्सा है। मलेशिया का उत्पादन लगभग 1.93 करोड़ मीट्रिक टन सालाना है, जिसमें से अधिकांश निर्यात किया जाता है।

उन्होंने यह भी बताया कि जुलाई 2025 में आयात शुल्क में बदलाव के बाद मलेशियाई क्रूड पाम ऑयल अब भारत में सबसे सस्ती और प्रतिस्पर्धी कीमत वाला खाद्य तेल बन गया है। इससे भारतीय बाजार में मलेशिया को अन्य देशों की तुलना में ज्यादा शुल्क लाभ मिल रहा है।

MPOC का भारत में लगभग तीन दशक पुराना जुड़ाव है। देश में मलेशिया की मजबूत सप्लाई चेन और टिकाऊ कृषि मॉडल इसकी विश्वसनीयता को और मजबूत बनाते हैं। MSPO (Malaysian Sustainable Palm Oil) सर्टिफिकेशन के जरिए मलेशिया जिम्मेदार और टिकाऊ पाम ऑयल उत्पादन में अग्रणी बन चुका है। 2025 तक लगभग 90% बागानों को MSPO सर्टिफिकेशन मिल चुका है।

राउंडटेबल के दौरान MPOC ने ऑयल टेक्नोलॉजिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (OTAI) के साथ भी साझेदारी की, जिसके तहत भारत में पाम ऑयल के स्वास्थ्य लाभों पर शोध और शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है।

संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि “नो पाम ऑयल” जैसे नकारात्मक प्रचारों का जवाब तथ्यों और वैज्ञानिक शोध के जरिए दिया जाएगा, ताकि उपभोक्ताओं में भरोसा और पारदर्शिता बनी रहे।

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